ऐसा क्या हुआ कि किसान ने कुप्पी से खुद पर डाल लिया केरोसिन

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केंद्रों पर समय पर तुलाई न होने से किसान रतजगा करने को मजबूर, ट्रैक्टर-ट्रॉली का किराया भी अधिक चुकाना पड़ रहा

ऐसा क्या हुआ कि किसान ने कुप्पी से खुद पर डाल लिया केरोसिन

हरदा. जिला प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की व्यवस्था पटरी पर नहीं दौड़ पा रही है। किसी केंद्र पर बारदान की कमी आ जाती है, तो कहीं हम्माल न होने से तुलाई रुक रही है। इस स्थिति में केंद्र पर उपज लेकर पहुंचने वाले किसानों को कई दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। परेशान किसानों की सुनवाई नहीं हो रही तो वे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो चले हैं। ऐसा ही एक मामला शनिवार को टिमरनी तहसील के रुंदलाय खरीदी केंद्र पर आया। एक सप्ताह बाद भी गेहूं की तुलाई नहीं हुई तो किसान के सब्र का बांध टूट गया। उसने कुप्पी से खुदपर केरोसिन उढ़ेला और आग लगाने का प्रयास किया। अन्य किसानों ने उसे रोका। घटनाक्रम से खरीदी केंद्र स्टाफ सन्न रह गया और अवकाश के दिन भी आनन फानन किसान का गेहूं तौला गया। बिल्लौद के किसान रुपक गुर्जर ने बताया कि उन्हें 8 अप्रैल को गेहंू तुलाने का एसएमएस मिला था। उनके तथा माताजी के नाम के दो खातों का 34 एकड़ का गेहूं तुलवाना था। वे उपज लेकर पहुंचे लेकिन बारदान नहीं होने से तुलाई नहीं हुई। बारदान आए तो हम्माल की कमी को तुलाई न करने का कारण बताया गया। शुक्रवार को दोनों व्यवस्था होने के बावजूद उनका गेहूं नहीं तौला गया। परेशान होकर उन्होंने केंद्र पर ही आत्मदाह करने का निर्णय लिया। रुपक के मुताबिक किसान की सहनशक्ति जब जवाब देती है तो उसे मजबूरी में इस तरह के निर्णय लेना पड़ता है। ऐसा कर वे सरकार को जगाना चाहते थे।

पत्रिका की सूचना पर जागा प्रशासन
पीडि़त किसान ने जब अपनी व्यथा पत्रिका को बताते हुए आत्मघाती कदम उठाने का निर्णय सुनाया तो प्रशासन को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद जिला मुख्यालय से अधिकारियों का दल भी केंद्र पर गया। टिमरनी तहसीलदार अलका एक्का ने बताया कि पटवारी को मौके पर भेजकर मामले की जांच कराई जा रही है। किसान का गेहूं समय पर क्यों नहीं तुला इसका पता लगाया जा रहा है। इधर, एआरसीएस छविकांत वाघमारे के मुताबिक एसएमएस में जो तिथि दी थी किसान तब नहीं पहुंचा। इसके बाद तुलाई करने से बिल नहीं बनता। इसके चलते यह स्थिति बनी। किसान की पूरी उपज की तुलाई हो चुकी है। केंद्रों की व्यवस्थाओं में सुधार लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

छह दिन बाद भी नहीं हुई तुलाई
टिमरनी। गेहूं तुलाने के लिए किसानों को 5 से 6 दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है। शनिवार-रविवार को परिवहन की वजह की वजह से तुलाई कार्य बंद रहता है। करताना खरीदी केंद्र पर शनिवार को गोदड़ी गांव के किसान विक्रम सिंह से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि 6 दिन हो गए, लेकिन गेहंू नहीं तौला गया। केंद्र पर उपज की रखवाली करना मजबूरी बन गया है। केंद्र पर बारदान नहीं होने से खरीदी बंद रही। बारदान आए तो अब परिवहन के चलते तुलाई बंद है।

कामकाज छोड़कर रखवाली में जुटे किसान
खिरकिया। किसानों को उपज बेचने के लिए केंद्रों पर लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। उन्हें ट्रॉली में भरी उपज की रखवाली में रतजगा तक करना पड़ रहा है। सोनपुरा, खेड़ी में कई ट्रॉलियां खड़ी हैं। यही स्थिति मोरगढ़ी केंद्र पर भी है। सहकारी समिति पर्यवेक्षक संतोष वर्मा के मुताबिक जिन केंद्रों पर उपज खरीदी में देरी हो रही है वहां के स्टाफ को इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

ट्रैक्टर-ट्रॉली का किराया बढ़ रहा
बालागांव. सहकारी समितियों में गेहूं लेकर पहुंचने वाले कई किसान किराए पर ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर जाते हैं। गेहूं नहीं तुलने से उन्हें ट्रॉली खड़ी करना पड़ता है। जब तक गेहूं नहीं तुले तब तक का किराया भी चुकाना पड़ता है। इससे वे बेवजह आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं।

रहटगांव में की जाए चना खरीदी : भाकिसं
रहटगांव। भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को कलेक्टर अनय द्विवेदी से मुलाकात कर रहटगांव में समर्थन मूल्य पर चना खरीदी करने की मांग की। संघ के जिला मंत्री भगवानदास गौर ने बताया कि कलेक्टर से चना खरीदी 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर करने, किसानों को पांच दिन पहले मैसेज देने, उसके नहीं पहुंचने पर अगले दिन उपज खरीदने तथा गेहूं की खरीदी में तेजी लाने की मांग भी की गई। गौर के मुताबिक कलेक्टर ने चना खरीदी संबंधी मांगों को शासन को भेजा है। उन्होंने रहटगांव उपमंडी में चना खरीदी शुरू कराने को कहा है।

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